चूल्हे की चिंगारी बनी काल: कपड़ो में लगी आग से विवाहिता की दर्दनाक मौत
बीकानेर। जिले के जामसर थाना क्षेत्र के खीचिया गांव से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां चूल्हे पर खाना बनाते समय लगी आग ने एक विवाहिता की जान ले ली। मिली जानकारी के अनुसार मृतका के भाई बीरबल पुत्र आसुराम मेघवाल निवासी पारवा ने पुलिस में मर्ग रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी बहन शीला पत्नी भीखाराम मेघवाल निवासी खीचिया 16 फरवरी को अपने घर में रोजमर्रा की तरह चूल्हे पर खाना बना रही थी। उसी दौरान अचानक चूल्हे से उठी चिंगारी ने उसके कपड़ों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और शीला गंभीर रूप से झुलस गई। घटना के समय घर में मौजूद परिजन तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े और किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह बुरी तरह झुलस चुकी थी। परिवारजन बिना समय गंवाए उसे तुरंत बीकानेर के पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया।
कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार शीला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार में शोक की लहर छा गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में भी मातम का माहौल है। एक सामान्य दिन की शुरुआत इस तरह दर्दनाक अंत में बदल जाएगी, इसका किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया था। पुलिस ने मृतका के भाई की रिपोर्ट के आधार पर मर्ग दर्ज कर लिया है और नियमानुसार शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है, हालांकि प्रथम दृष्टया यह एक दुर्घटना ही प्रतीत हो रही है।
यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी उपयोग किए जा रहे पारंपरिक चूल्हों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अक्सर महिलाएं ढीले-ढाले या सिंथेटिक कपड़े पहनकर चूल्हे पर खाना बनाती हैं, जो आग पकड़ने में ज्यादा संवेदनशील होते हैं। थोड़ी सी लापरवाही या चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाना बनाते समय हमेशा सूती और फिट कपड़े पहनने चाहिए, ताकि आग लगने की संभावना कम हो। इसके अलावा चूल्हे के आसपास ज्वलनशील पदार्थों को नहीं रखना चाहिए और आग बुझाने के लिए पानी या रेत जैसी व्यवस्था पास में रखनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस कनेक्शन और सुरक्षित कुकिंग विकल्पों को बढ़ावा देना भी ऐसे हादसों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि घरेलू कामकाज के दौरान भी कितनी सावधानी बरतना जरूरी है। शीला की मौत ने उसके परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है, वहीं समाज के लिए भी यह एक चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। सरकार और प्रशासन को भी चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित खाना बनाने के तरीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित ईंधन और साधन उपलब्ध करवाए जाएं। ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े। यह घटना भले ही एक हादसा हो, लेकिन इससे मिलने वाली सीख बेहद महत्वपूर्ण है। सावधानी और जागरूकता ही ऐसे हादसों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।






