अब जमीनी ऑपरेशन होगी आर-पार की लड़ाई, अमेरीका के 3500 सैनिक लड़ाकू विमानो सहित मिडिल ईस्ट पहुंचे
नई दिल्ली/मिडिल ईस्ट। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने अपने 3500 अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में तैनात कर दिया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में जमीनी स्तर पर भी बड़ा सैन्य अभियान शुरू हो सकता है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब यह संघर्ष केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहकर जमीनी ऑपरेशन में बदलने की दिशा में बढ़ रहा है।
3500 अमेरिकी सैनिक पहुंचे, USS त्रिपोली से हुई तैनाती
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 3500 अतिरिक्त सैनिक USS Tripoli युद्धपोत के जरिए मिडिल ईस्ट पहुंचे हैं। ये सैनिक अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं, जिन्हें तेजी से कार्रवाई करने और कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन चलाने के लिए जाना जाता है। इन सैनिकों के साथ बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक हथियार भी भेजे गए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका केवल रक्षा की स्थिति में नहीं है, बल्कि आक्रामक रणनीति पर भी काम कर रहा है।
जमीनी ऑपरेशन की तैयारी, लंबी लड़ाई के संकेत
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह ऑपरेशन पूरी तरह बड़े पैमाने पर नहीं होगा, लेकिन इसमें स्पेशल फोर्स के छापे, सीमित स्तर पर इन्फैंट्री एक्शन और टारगेटेड मिशन शामिल हो सकते हैं। अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सैन्य हलचल यह संकेत दे रही है कि स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
दूसरी ओर ईरान भी इस तैनाती को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने अपने फ्रंट पेज पर अमेरिका को चेतावनी देते हुए लिखा— “ये सैनिक ताबूत में वापस लौटेंगे, नरक में आपका स्वागत है।”यह बयान दर्शाता है कि ईरान किसी भी संभावित जमीनी हमले का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान में अहम कूटनीतिक बैठक
इस बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान में तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात होगी और मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान को इस बैठक के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि उसके ईरान और सऊदी अरब दोनों से अच्छे संबंध हैं। साथ ही वह इस संघर्ष में किसी एक पक्ष के साथ सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है, जिससे उसे एक न्यूट्रल मंच माना जा रहा है।
हूती विद्रोहियों के हमले तेज
यमन के हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से लगातार हमले तेज कर दिए हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिणी इजराइल के अहम ठिकानों को निशाना बनाया और दावा किया कि जब तक इजराइल अपनी कार्रवाई नहीं रोकेगा, तब तक हमले जारी रहेंगे। हूती समूह के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ये हमले ईरान और हिजबुल्लाह के समर्थन से किए जा रहे हैं, जिससे यह संघर्ष और व्यापक होता जा रहा है।
रिहायशी इलाकों पर हमले, नागरिक भी प्रभावित
ईरान की सरकारी मीडिया ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया, जिसमें रिहायशी इलाके पर हमले के बाद की स्थिति दिखाई गई। इस हमले में लगभग 9 लोग घायल हुए और 20 से अधिक अपार्टमेंट को नुकसान पहुंचा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि युद्ध अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिक भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
लेबनान में भी संघर्ष जारी
लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है। हाल ही में एक मुठभेड़ में 22 वर्षीय इजराइली सैनिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। इससे साफ है कि यह युद्ध अब कई मोर्चों पर फैल चुका है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
अमेरिका में भी विरोध प्रदर्शन
इस बीच अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ “No Kings” नाम से बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए, जिनमें करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया।
ये प्रदर्शन देश के सभी 50 राज्यों में 3300 से अधिक स्थानों पर आयोजित किए गए, जो दर्शाता है कि युद्ध और विदेश नीति को लेकर अमेरिका के अंदर भी मतभेद बढ़ रहे हैं।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा।
- तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है
- वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है
- अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है
भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से। मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं और अब जमीनी युद्ध की आशंका भी बढ़ गई है। अमेरिका की सैन्य तैनाती, ईरान की चेतावनी, हूती विद्रोहियों के हमले और कूटनीतिक हलचल—ये सभी संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं। यदि समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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