अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले इजराइल-पाकिस्तान में तनातनी, बयानबाज़ी से बढ़ा विवाद, रक्षा मंत्री बोले- इजराइल कैंसर की तरह है
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता से पहले इजराइल और पाकिस्तान के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। यह तनाव तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजराइल के खिलाफ तीखा बयान दिया। ख्वाजा आसिफ ने लेबनान में इजराइली कार्रवाई को लेकर आरोप लगाते हुए इजराइल को “बुराई का प्रतीक” बताया और कहा कि गाजा, ईरान और अब लेबनान में निर्दोषों की हत्या की जा रही है। उनके इस बयान पर इजराइल की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई।
इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आसिफ के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह इजराइल के अस्तित्व को खत्म करने जैसी मांग के बराबर है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। खासकर ऐसे देश से, जो खुद को शांति वार्ता का मध्यस्थ बता रहा हो। विवाद बढ़ने के बाद ख्वाजा आसिफ ने अपनी पोस्ट हटा दी। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को सीजफायर को लेकर अहम वार्ता होने जा रही है, जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होगी। बैठक के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचेगा, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही पहुंच चुका है।
बताया जा रहा है कि यह वार्ता इस्लामाबाद के सेरेना होटल में होगी। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस टीम का नेतृत्व करेंगे, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ प्रतिनिधित्व करेंगे।
इन प्रमुख मुद्दों पर होगी चर्चा:
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे और अपनी परमाणु सुविधाओं को सीमित करे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: यह वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ईरान नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे बिना किसी बाधा के खुला रखना चाहता है।
बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम: अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता पर रोक चाहता है।
प्रतिबंध (सैंक्शंस): ईरान की मांग है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और उसके फंसे हुए संपत्ति (फ्रोजन एसेट्स) वापस किए जाएं।
कुल मिलाकर, एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान वार्ता से शांति की उम्मीदें जुड़ी हैं, वहीं इजराइल-पाकिस्तान के बीच बढ़ती बयानबाज़ी ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।










