कामदा एकादशी आज: शिववास योग का शुभ संयोग, व्रत-पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, बीकानेर में खाटू श्याम मंदिर में विशेष आयोजन
बीकानेर न्यूज़,29 मार्च। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 29 मार्च को श्रद्धा, आस्था और भक्ति भाव के साथ मनाई जा रही है। यह एकादशी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही यह व्रत मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश करने वाला माना जाता है।
बीकानेर में खाटू श्याम मंदिर में विशेष आयोजन
बीकानेर में जयपुर रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर में कामदा एकादशी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। सुबह भगवान की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई है। मंदिर को दिल्ली से मंगाए गए सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है और बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया है। दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। श्रद्धालु इस दिन बाबा को गुलाब इत्र अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है।

एकादशी का शुभ मुहूर्त और पारण समय
ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास के अनुसार कामदा एकादशी सूर्योदय से सुबह 07:47 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दिन शिववास योग बनने से पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। व्रत का पारण 30 मार्च को सुबह 6:31 बजे से 9:37 बजे के बीच करना शुभ रहेगा। इस अवधि में विधिपूर्वक व्रत खोलने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस बार एकादशी पर शिववास योग बनने से भक्तों को दोहरी कृपा प्राप्त होने का अवसर मिलेगा। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि शिववास योग में रुद्राभिषेक या शिव पूजन करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी कथा
कामदा एकादशी व्रत की कथा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत की कथा सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। इस व्रत में श्रद्धालु पहले भगवान की पूजा करते हैं, फिर कथा सुनते हैं और अंत में दान-पुण्य करते हैं। यह व्रत आत्मशुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। कामदा एकादशी व्रत की तैयारी दशमी तिथि से ही शुरू हो जाती है। दशमी के दिन एक समय सात्विक भोजन करने का नियम है, जिसमें जौ, गेहूं और मूंग शामिल होते हैं। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और विष्णु सहस्त्रनाम तथा भगवद्गीता का पाठ किया जाता है। दिनभर भजन-कीर्तन, ध्यान और सत्संग में समय बिताया जाता है। कई श्रद्धालु रातभर जागरण कर भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं।
कामदा एकादशी पर क्या करें
ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, तुलसी के पौधे की पूजा करें, विष्णु सहस्त्रनाम और गीता का पाठ करें, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या हल्दी का दान करें, शाम को दीपक जलाएं, रात में जागरण कर भजन-कीर्तन करें
क्या न करें- इस दिन चावल, जौ, मसूर, प्याज, लहसुन का सेवन न करें, तुलसी के पत्ते न तोड़ें, बाल, नाखून या दाढ़ी न काटें, दिन में सोने से बचें, झूठ, क्रोध और अपशब्दों से दूर रहें, सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू न लगाएं
कामदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। इस दिन किया गया व्रत, पूजा और दान जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शिववास योग के इस विशेष संयोग में भगवान विष्णु और भगवान शिव की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का यह दुर्लभ अवसर है, जिसे श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ मना रहे हैं। ऐसे में यह दिन हर भक्त के लिए आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति का विशेष अवसर बन गया है।









