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बीकानेर: इस गांव में तेंदुए ने पिता-पुत्र पर किया हमला, दांती के वॉर से लेपर्ड की मौत

On: March 29, 2026 6:37 AM
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बीकानेर: इस गांव में तेंदुए ने पिता-पुत्र पर किया हमला, दांती के वॉर से लेपर्ड की मौत

बीकानेर न्यूज़, 29 मार्च। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र बज्जू में शनिवार को एक बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके में दहशत और चर्चा दोनों पैदा कर दी। बरसलपुर ग्राम पंचायत के चक 6 बीडीवाई में पहली बार एक लेपर्ड (तेंदुआ) के पहुंचने, उसके द्वारा हमला करने और बाद में उसकी मौत होने की पुष्टि हुई है। शुरुआत में इस घटना को ग्रामीणों ने अफवाह समझा, लेकिन कुछ ही देर बाद पास के खाले में लेपर्ड का शव मिलने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई। यह घटना बीकानेर जैसे रेगिस्तानी इलाके में वन्यजीवों की बदलती गतिविधियों की ओर भी संकेत करती है।

खेत में काम करते पिता-पुत्र पर अचानक हमला
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 4 बजे बरसलपुर पंचायत के चक 6 बीडीवाई में किसान ओमप्रकाश मेघवाल और उनके पुत्र कमल मेघवाल अपने खेत में फसल काटने का काम कर रहे थे। उसी दौरान अचानक झाड़ियों में छिपा एक लेपर्ड बाहर निकला और उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से दोनों घबरा गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जान बचाने के लिए दोनों ने हाथ में मौजूद फसल काटने के औजार ‘दांती’ से लेपर्ड पर जवाबी हमला कर दिया।

बीकानेर: इस गांव में तेंदुए ने पिता-पुत्र पर किया हमला, दांती के वॉर से लेपर्ड की मौत

साहसिक मुकाबला, लेपर्ड हुआ घायल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिता-पुत्र ने पूरी हिम्मत और सूझबूझ के साथ लेपर्ड का मुकाबला किया। दांती से किए गए वारों के कारण लेपर्ड गंभीर रूप से घायल हो गया और वहां से भाग निकला। हालांकि कुछ ही देर बाद पास के एक खाले (वॉटरकोर्स) में उसका शव मिलने से यह साफ हो गया कि वह ज्यादा दूर नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई। इस घटना की शुरुआत में जब ग्रामीणों ने लेपर्ड के हमले की बात सुनी तो इसे सामान्य अफवाह माना गया। कारण यह था कि बीकानेर क्षेत्र में इस तरह के बड़े जंगली जानवर का दिखना बेहद दुर्लभ है। लेकिन जैसे ही खाले में लेपर्ड का शव मिला, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों को विश्वास हो गया कि यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि वास्तविक घटना है।

घायल पिता-पुत्र का इलाज जारी
घटना की सूचना मिलते ही रणजीतपुरा थाना पुलिस के एएसआई नैनूसिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत घायल ओमप्रकाश और कमल को बरसलपुर अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को खतरे से बाहर बताया है। हालांकि उनके शरीर पर हमले के निशान हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपेंद्र सिंह के अनुसार, लेपर्ड के शव को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय 156 में सुरक्षित रखवाया गया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया जाएगा, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लेपर्ड की मौत किन कारणों से हुई और उसे कितनी गंभीर चोटें आई थीं।

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जांच का विषय: रेगिस्तान में कैसे पहुंचा लेपर्ड?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक लेपर्ड जैसे जंगली जानवर ने बीकानेर के इस रेगिस्तानी इलाके तक कैसे पहुंच बनाई। वन विभाग इस बात की गहन जांच कर रहा है कि क्या यह जानवर किसी अन्य क्षेत्र से भटककर यहां पहुंचा या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, भोजन की तलाश और आवासीय क्षेत्र में बदलाव के कारण वन्यजीव नए इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। बीकानेर जिले में पहले भी कई बार लेपर्ड या तेंदुए के दिखने की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इनकी पुष्टि नहीं हो पाती थी।

इससे पहले कई साल पहले लूणकरणसर क्षेत्र में एक तेंदुए को काफी मशक्कत के बाद पकड़ा गया था, लेकिन बज्जू क्षेत्र में इस तरह की घटना पहली बार सामने आई है, जहां न केवल हमला हुआ बल्कि लेपर्ड का शव भी बरामद हुआ।

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ग्रामीणों में दहशत, गश्त बढ़ाने की मांग
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर एक लेपर्ड यहां तक पहुंच सकता है, तो भविष्य में अन्य वन्यजीवों के आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों को सतर्क रहने और अकेले खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि कहीं किसी जंगली जानवर की गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना दें।

बज्जू के चक 6 बीडीवाई में हुई यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह वन्यजीवों के बदलते व्यवहार और उनके नए क्षेत्रों में प्रवेश का संकेत भी देती है। जहां एक ओर पिता-पुत्र की बहादुरी ने उनकी जान बचाई, वहीं दूसरी ओर यह घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए जरूरी है कि सतर्कता, निगरानी और जागरूकता को बढ़ाया जाए, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम किया जा सके।

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