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बड़ी खबर: इजराइल-ईरान यूद्ध के बीच रूस ने पेट्रोल निर्यात पर लगाई रोक, दुनिया भर में मचा हाहाकार, भारत पर क्या होगा असर?

On: March 29, 2026 7:31 AM
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बड़ी खबर: इजराइल-ईरान यूद्ध के बीच रूस ने पेट्रोल निर्यात पर लगाई रोक, दुनिया भर में मचा हाहाकार, भारत पर क्या होगा असर?

बीकानेर न्यूज़। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच रूस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का मकसद घरेलू स्तर पर ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रण में रखना बताया जा रहा है। रूस का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

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घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता
रूसी सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी प्राथमिकता देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। उप-प्रधानमंत्री नोवाक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण कीमतों में तेज बदलाव हो रहा है, जिससे घरेलू बाजार पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निर्यात पर अस्थायी रोक लगाना जरूरी हो गया है। रूस रोजाना लगभग 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात करता है। यह मात्रा वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में निर्यात पर रोक से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई घट सकती है, जिसका असर कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

किन देशों पर पड़ेगा ज्यादा असर
रूस के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े आयातक हैं। इनमें चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीकी देश और सिंगापुर जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं। ये देश अपने ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर काफी हद तक निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों को अब वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत पर सीधा असर कम, पर अप्रत्यक्ष प्रभाव संभव
भारत के संदर्भ में यह खबर थोड़ी राहत देने वाली है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत सीधे तौर पर पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन पर निर्भर नहीं है, बल्कि कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल पर निर्भर करता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 20 प्रतिशत रूस से आता है। भारत का रिफाइनरी नेटवर्क काफी मजबूत है, जिसके जरिए वह कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करता है। देश में रोजाना लगभग 56 लाख बैरल कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता है। इससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि भारत तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है। यही कारण है कि रूस के पेट्रोल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर वैश्विक बाजार में सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। पहले से ही जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

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पहले भी लग चुका है निर्यात पर प्रतिबंध
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने पेट्रोल या डीजल के निर्यात पर रोक लगाई है। इससे पहले भी घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने और सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कदम उठाया जा चुका है। पिछले वर्ष भी रूस ने इसी तरह का फैसला लिया था, जब यूक्रेन युद्ध के दौरान उसके कई रिफाइनरी प्लांट प्रभावित हुए थे। उस समय भी घरेलू बाजार में ईंधन की कमी और कीमतों में उछाल को रोकने के लिए निर्यात पर रोक लगाई गई थी। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, रूस ने पिछले साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल का निर्यात किया था, जो प्रतिदिन लगभग 1.17 लाख बैरल के बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि रूस वैश्विक पेट्रोल बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।

ऊर्जा बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
रूस के इस फैसले से पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी। इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण तेल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। ऐसे में रूस जैसे बड़े उत्पादक देशों के फैसले वैश्विक बाजार को और अधिक प्रभावित कर सकते हैं।

रूस का रणनीतिक कदम
रूस का यह फैसला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रूस की स्थिति को मजबूत कर सकता है। नोवाक ने हाल ही में संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर रूस तेल निर्यात पर भी अतिरिक्त नियंत्रण लगा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस का यूराल्स क्रूड और अन्य उत्पाद इस समय ब्रेंट क्रूड के बराबर या उससे अधिक कीमत पर बिक रहे हैं, जो वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

सरकार और तेल कंपनियों का दावा
रूस में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह भी बताया गया कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। तेल कंपनियों ने भी भरोसा दिलाया है कि आपूर्ति में कोई कमी नहीं आएगी और कीमतों को नियंत्रण में रखा जाएगा। यही कारण है कि सरकार ने निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय लिया, ताकि घरेलू बाजार में किसी तरह की अस्थिरता न आए।

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